बिलासपुर

पटवारियों का सरकार को अल्टीमेटम: पदोन्नति, वेतन विसंगति से लेकर 16 सूत्रीय मांगों पर सौंपा ज्ञापन

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ की जिला इकाई बिलासपुर ने सोमवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों के निराकरण को लेकर प्रशासन के समक्ष जोरदार तरीके से आवाज उठाई। संघ ने मुख्य सचिव, अधीक्षक भू-अभिलेख तथा अतिरिक्त कलेक्टर (भू-अभिलेख) के नाम अलग-अलग ज्ञापन सौंपते हुए पदोन्नति, वेतन विसंगति, कार्यालयीन सुविधाओं और राजस्व कार्यों में एकरूपता सुनिश्चित करने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से प्रेषित किया गया।
संघ ने ज्ञापन में कहा कि प्रदेशभर के पटवारियों की पदोन्नति वर्षों से लंबित है, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। कई पटवारी पूरी सेवा अवधि पटवारी पद पर ही बिताकर सेवानिवृत्त हो जाते हैं। इसलिए राजस्व निरीक्षक के सभी रिक्त पदों को केवल पटवारियों की पदोन्नति से भरा जाए तथा पदोन्नति के लिए स्पष्ट और समयबद्ध नियम बनाए जाएं। संघ ने यह भी सुझाव दिया कि 50 प्रतिशत पद वरिष्ठता तथा 50 प्रतिशत विभागीय परीक्षा के आधार पर भरे जाएं। ज्ञापन में वर्ष 2010 बैच के पटवारियों की वेतन विसंगति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संघ का कहना है कि वेतन निर्धारण में हुई त्रुटियों के कारण उच्च वेतनमान मिलने के बावजूद कई कर्मचारियों का मूल वेतन कम निर्धारित हुआ है। इसका असर न केवल वर्तमान वेतन पर बल्कि भविष्य की वेतनवृद्धि, पदोन्नति और पेंशन पर भी पड़ रहा है। संघ ने इस विसंगति को तत्काल दूर करने की मांग की। इसके अलावा अधीक्षक भू-अभिलेख के नाम सौंपे गए 16 सूत्रीय ज्ञापन में विभागीय एवं कार्यालयीन समस्याओं के समाधान की मांग की गई। इनमें वरिष्ठता सूची का नियमित अद्यतन, 25 वर्ष से अधिक सेवा दे चुके पटवारियों को कंप्यूटर ऑपरेटर की सुविधा, प्रत्येक पटवारी कार्यालय में आवश्यक राजस्व अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराना, सर्विस बुक को ई-सर्विस बुक में परिवर्तित करना, समय पर वेतन भुगतान, गोपनीय चरित्रावली का संधारण, मेडिकल अवकाश अवधि का वेतन, कार्यालयों में फर्नीचर और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा तहसीलों में प्रोग्रामर की नियुक्ति जैसी मांगें शामिल हैं। संघ ने यह भी मांग उठाई कि 62 वर्ष से अधिक आयु के कार्य करने में असमर्थ कोटवारों के स्थान पर युवा कोटवारों की नियुक्ति की जाए, राजस्व अभिलेखों के ऑनलाइन अद्यतन की व्यवस्था मजबूत की जाए तथा अधीक्षक भू-अभिलेख द्वारा नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जाए, ताकि कार्यों की निगरानी और समस्याओं का समय पर समाधान हो सके। अतिरिक्त कलेक्टर (भू-अभिलेख) को सौंपे गए ज्ञापन में विभिन्न शासकीय जानकारियों के संकलन में एकरूपता लाने की मांग की गई। संघ ने बताया कि अलग-अलग तहसीलों में अलग प्रारूपों में जानकारी मांगे जाने से भ्रम और कार्य में अनावश्यक विलंब होता है। इसलिए सभी 12 तहसीलों के लिए एक समान अंतिम प्रारूप निर्धारित किया जाए और उसमें बार-बार बदलाव न किया जाए। साथ ही राजस्व निरीक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण, शासकीय भूमि संबंधी संशोधित प्रारूपों के स्पष्ट दिशा-निर्देश, भूमि के भौतिक सत्यापन के लिए संयुक्त दल का गठन तथा जानकारी प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय-सीमा तय करने की भी मांग की गई।
राजस्व पटवारी संघ ने उम्मीद जताई कि शासन और प्रशासन उनकी मांगों पर सकारात्मक एवं सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र निर्णय लेगा, जिससे पटवारियों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान होगा और राजस्व व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

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