पचपेड़ी

पचपेड़ी क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं ने संभाला मोर्चा….खुद पकड़ रही अवैध शराब, पुलिस-आबकारी की कार्रवाई पर उठे सवाल,

बिलासपुर – मस्तूरी जनपद पंचायत क्षेत्र के पचपेड़ी थाना अंतर्गत कई गांवों में कथित अवैध महुआ शराब की बिक्री को लेकर ग्रामीणों, खासकर महिलाओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। खपरी भटचौरा, लोहर्सी डेरा, मनवा, भिलौनी, बेल्हा, सोन, सोनसरी डेरा और सबरिया डेरा सहित आसपास के गांवों में अवैध शराब की बिक्री बंद कराने की मांग को लेकर महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिरों, स्कूलों और बस्तियों के आसपास तक कच्ची शराब की भट्टियां संचालित हो रही हैं और शराब की अवैध बिक्री धड़ल्ले से जारी है।

महिलाओं का कहना है कि वे दिनभर खेतों में मजदूरी और घरेलू कामकाज में व्यस्त रहती हैं, लेकिन पीछे से परिवार के पुरुष शराब खरीदने में मेहनत की कमाई खर्च कर देते हैं। शराब के नशे में घर लौटने के बाद विवाद, गाली-गलौज और मारपीट की घटनाओं से महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई परिवारों में बच्चों की पढ़ाई, इलाज और शादी-विवाह जैसे जरूरी खर्चों के लिए रखे पैसे तक शराब में बर्बाद होने की बात ग्रामीण महिलाओं ने कही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध शराब के खिलाफ वे पहले भी कई बार पुलिस और उच्च अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। महिलाओं ने अब सामूहिक रूप से आवाज बुलंद करते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार विभाग समय रहते सख्ती नहीं बरतता है तो गांवों में सामाजिक और आर्थिक समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कार्रवाई की उम्मीद में लंबे समय तक शिकायत करने के बाद अब महिलाएं खुद अवैध शराब के खिलाफ सक्रिय होती नजर आ रही हैं। ग्रामीण महिलाओं द्वारा कथित कच्ची शराब की भट्टियों और बिक्री के खिलाफ मौके पर पहुंचकर विरोध जताने की पहल ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। महिलाओं का यह कदम केवल विरोध नहीं, बल्कि गांवों में नशे के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ सामाजिक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। जनपद पंचायत सहकारिता सभापति प्रतिनिधि नरेंद्र नायक ने आरोप लगाया कि अवैध महुआ शराब बनाने वाले कोचियों की गतिविधियों में सरकारी शराब दुकानों से जुड़े कुछ सेल्समैन की भूमिका भी हो सकती है।

उनका कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि अवैध शराब की बिक्री को बढ़ावा देने वालों पर कार्रवाई की जा सके। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिलाओं की शिकायत और विरोध के बाद प्रशासन कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस और आबकारी विभाग केवल छिटपुट कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि अवैध शराब की भट्टियों, बिक्री के ठिकानों और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की पहचान कर सख्त और निरंतर कार्रवाई करें। महिलाओं ने साफ कर दिया है कि गांवों में नशे के खिलाफ उनकी लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है।

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