बिलासपुर

पाराघाट क्षेत्र में किसानों की जमीन और पुनर्वास का मुद्दा गरमाया, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बिलासपुर – पाराघाट, बेलटुकरी और भनेसर क्षेत्र के किसानों की जमीन, रोजगार, पुनर्वास और शासकीय भूमि से जुड़े मामलों को लेकर सोमवार को जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत रखी गई। जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के नेतृत्व में करीब 55–60 किसान परिवारों के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की। किसानों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2003 से 2009 के बीच वसुंधरा पावर प्लांट के लिए करीब 117 एकड़ कृषि भूमि नौकरी और पुनर्वास के आश्वासन पर खरीदी गई थी। उनका कहना है कि भूमि लेने के बाद करीब 12–13 वर्षों तक प्लांट स्थापित नहीं किया गया। इसके बाद वर्ष 2022 में उक्त भूमि को दूसरी कंपनी या प्लांट को बेचने अथवा हस्तांतरित किए जाने का मामला सामने आया। किसानों ने भूमि खरीद, स्वीकृतियों, हस्तांतरण और रोजगार-पुनर्वास से जुड़े वादों की जांच की मांग की है। ज्ञापन में शासकीय खसरा नंबर 170 की 10.21 एकड़ भूमि को लेकर भी शिकायत की गई। किसानों का आरोप है कि वर्ष 2022 में बंटाकन के बाद करीब 2.94 एकड़ भूमि प्लांट के नाम दर्ज की गई। किसानों ने पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों, बंटाकन तथा नामांतरण की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा राशि स्टील एवं पावर लिमिटेड से प्रभावित करीब 40 किसान परिवारों के रोजगार और पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों का कहना है कि भूमि लेते समय नौकरी और पुनर्वास का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सभी प्रभावित परिवारों को इसका लाभ नहीं मिला। किसानों ने प्लांट प्रबंधन से बातचीत के दौरान पुलिस-प्रशासन के माध्यम से दबाव बनाने के आरोप भी लगाए और इसकी जांच की मांग की।
महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि किसानों की जमीन उनकी आजीविका और भविष्य का आधार है। यदि निर्धारित उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है तो पूरे मामले की जांच कर किसानों को नियमानुसार भूमि वापसी, उचित क्षतिपूर्ति, रोजगार और पुनर्वास का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जारी रखेगी।

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