2.32 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन ने खोली साइबर ठगी की नई कड़ी… बैंक खातों को बनाया ‘म्यूल अकाउंट’

बिलासपुर – साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने और संदिग्ध रकम के लेनदेन के लिए खातों के इस्तेमाल के मामले में रेंज साइबर थाना पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए हैं। छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की मंगला शाखा की मैनेजर आरती कुरील की शिकायत पर पुलिस ने सांवरिया इंटरप्राइजेस और अजय फार्म हाउस के नाम से संचालित बैंक खातों के धारकों के खिलाफ जांच शुरू की है। दोनों खातों में कुल करीब 2.32 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। बैंक मैनेजर की शिकायत के मुताबिक सांवरिया इंटरप्राइजेस के नाम से संचालित खाते के धारक राजकुमार धाकड़ 23 वर्ष, निवासी ग्राम निपनिया के खाते में 22 मई से 3 जून 2026 के बीच 12 लाख 11 हजार 680 रुपये का संदिग्ध लेनदेन पाया गया। बैंक की जांच में आशंका जताई गई कि खाते का इस्तेमाल संदिग्ध रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। इसी नाम से व्यापार विहार शाखा में अमृत लाल जाट द्वारा भी खाता खुलवाए जाने की जानकारी बैंक ने पुलिस को दी है।
अजय फार्म हाउस खाते में 2.20 करोड़ की संदिग्ध हलचल
दूसरे मामले में अजय फार्म हाउस के नाम से संचालित खाते में महज कुछ सप्ताह के भीतर करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन सामने आया। खाते के धारक अजय कुमार सोनी 36 वर्ष, निवासी रामनगर, टिकरीपारा, तखतपुर हैं। बैंक के अनुसार 18 मई से 12 जून 2026 के बीच खाते में 2 करोड़ 20 लाख 68 हजार 443 रुपये का संदिग्ध हस्तांतरण दर्ज किया गया। बैंक प्रबंधन ने आशंका जताई है कि खाते को अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराकर म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया गया। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने के लिए किए जाने की आशंका रहती है। दोनों मामलों में बैंक ने पुलिस को खाते के स्टेटमेंट, केवाईसी और अन्य संबंधित दस्तावेज सौंपे हैं। रेंज साइबर थाना पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 317(5) और 323 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब रकम भेजने और प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान करने के साथ पूरे ट्रांजेक्शन नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि खातों का संचालन वास्तव में कौन कर रहा था और संदिग्ध रकम का अंतिम गंतव्य कहां था।


