संस्कृत दिवस पर विरानी पब्लिक स्कूल सीपत में गूंजे मंत्र और श्लोक, कथक व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ाया।

सीपत – विरानी पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल सीपत में संस्कृत दिवस का आयोजन हर्षोल्लास एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती तारा गिरी ने की। कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में प्रदीप पाण्डेय एवं श्रीमती पूनम मंडल उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा मनमोहक कथक नृत्य की प्रस्तुति के साथ प्रतियोगितात्मक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। संस्कृत दिवस के अवसर पर मंत्रोच्चारण, श्लोकोच्चारण, कहानी वाचन एवं एकल गीत गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।कार्यक्रम के बीच-बीच में विद्यार्थियों द्वारा भारतीय पारंपरिक एवं सांस्कृतिक गीतों पर मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिसने समारोह में भारतीय संस्कृति एवं परंपरा के रंग भर दिए। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने तालियों के साथ उत्साहपूर्वक सराहा।अपने उद्बोधन में प्राचार्या श्रीमती तारा गिरी ने संस्कृत को भारतीय संस्कृति, ज्ञान एवं परंपरा की आधारशिला बताते हुए कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत एवं भगवद्गीता जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में रचे गए हैं।

उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन विद्यार्थियों में अनुशासन, तार्किक चिंतन, एकाग्रता एवं भाषा-कौशल का विकास करता है। उन्होंने आधुनिक युग में योग, आयुर्वेद, दर्शन तथा भारतीय ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में संस्कृत के निरंतर महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत को रुचि एवं उत्साह के साथ पढ़ने तथा संस्कृत के श्लोकों एवं सुभाषितों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।कार्यक्रम का संचालन संस्कृत शिक्षक दीपक राठौर एवं गोमती वस्त्रकार द्वारा किया गया। समारोह में विद्यालय के समस्त विद्यार्थी एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में दीपक राठौर द्वारा निर्णायकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।संस्कृत दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान तथा अपनी गौरवशाली ज्ञान-परंपरा से जुड़ने की भावना को सुदृढ़ करने वाला रहा।


