फर्जी परमिट की आड़ में लकड़ी का खेल! रायगढ़ में इंटरस्टेट तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

रायगढ़ – जंगलों से खैर और तेंदू की बेसकीमती लकड़ियों की अवैध कटाई कर उन्हें फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट के जरिए दूसरे राज्यों में खपाने वाले बड़े इंटरस्टेट सिंडिकेट का रायगढ़ पुलिस और वन विभाग ने पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वहीं, वाहन मालिक और सिंडिकेट से जुड़े आरोपी भरत कुमार मेश्राम की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क छत्तीसगढ़ के रायगढ़ सहित ओडिशा और मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों तक फैला हुआ था। आरोप है कि गिरोह ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर वन क्षेत्रों से खैर और तेंदू के पेड़ कटवाता था। इसके बाद लकड़ियों को रायगढ़ के जामटीकरा (गढ़उमरिया) स्थित गोदाम में जमा किया जाता था। यहां लकड़ियों की छिलाई और अन्य प्रक्रिया के बाद उन्हें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भेजकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था। मामले का खुलासा 5 मई 2025 को वन विभाग की कार्रवाई के दौरान हुआ था। गढ़उमरिया स्थित गोदाम में छापेमारी के दौरान एक ट्रक में लदे 42 नग तेंदू के लट्ठे, करीब 1.731 घन मीटर लकड़ी मिली। इसके अलावा गोदाम से तेंदू और खैर प्रजाति के 146 नग लट्ठे, 6.741 घन मीटर लकड़ी, नौ चट्टा जलाऊ लकड़ी, एक कटर मशीन, वजन मशीन, दो कुल्हाड़ी और एक हथौड़ा बरामद किया गया था।

छापेमारी के दौरान आरोपियों की ओर से लकड़ी के परिवहन से संबंधित ट्रांसपोर्ट परमिट (टीपी) प्रस्तुत किया गया, लेकिन जांच में परमिट पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। वन विभाग को दस्तावेज प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हुआ। विस्तृत जांच के बाद 2 सितंबर 2026 को थाना जूटमिल में अपराध दर्ज कराया गया। पुलिस ने मामले में बीएनएस की धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज और संगठित अपराध से जुड़ी धाराओं के साथ भारतीय वन अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया। एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने जांच आगे बढ़ाई और आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब फरार आरोपी भरत मेश्राम की तलाश के साथ सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी परमिट नेटवर्क की भी जांच कर रही है।


