मल्हार स्कूल में बेटियों से दुर्व्यवहार साबित, डीईओ ने किया सिर्फ तबादला – क्या यही है न्याय.?

भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर– मल्हार के शासकीय स्कूल में छात्राओं से दुर्व्यवहार के मामले में जांच समिति ने प्राचार्य और दो व्याख्याताओं के खिलाफ गंभीर आरोपों की पुष्टि कर दी है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की कार्रवाई सिर्फ तबादले तक सीमित रहने से सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच रिपोर्ट में प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला पर छात्राओं से दुर्व्यवहार, सेनेटरी पैड वितरण में अनियमितता, प्रति छात्र 500 रुपये की अवैध वसूली और शिक्षकीय दायित्वों में लापरवाही सिद्ध हुई है। व्याख्याता रश्मि गुप्ता पर मूल्यांकन और अध्यापन का काम भृत्य से कराने और दुर्व्यवहार के आरोप सिद्ध हुए हैं। जानकारों का कहना है कि जब आर्थिक अनियमितता और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े आरोप सिद्ध हो गए हैं, तो नियमानुसार निलंबन और विभागीय जांच होनी चाहिए थी। केवल एक स्कूल से दूसरे स्कूल में भेजना दंड नहीं, बल्कि समस्या का स्थानांतरण है।
आपको बता दे कि कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए थे। मामले की पृष्ठभूमि में विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था, विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार तथा शैक्षणिक वातावरण से संबंधित शिकायतें जनप्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त हुई थीं। इसके अलावा 1 अक्टूबर को विद्यालय की छात्राओं ने कलेक्टर के समक्ष अपनी शिकायत रखकर संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। शिकायतों की जांच के लिए 30 सितंबर को तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। दल ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बयान लेकर 7 अक्टूबर को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्राचार्य से संबंधित जांच निष्कर्षों में विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार, छात्राओं को सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने में अनियमितता, शाला शुल्क के नाम पर प्रति विद्यार्थी 500 रुपए अतिरिक्त राशि की वसूली के साथ शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। जिसमे व्याख्याता रश्मि गुप्ता से संबंधित जांच में विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन और अध्यापन कार्य भृत्य से कराने और शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। वही व्याख्याता संजय दुबे के संबंध में भी विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार और गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। जिसके आधार पर
कलेक्टर के अनुमोदन से जिला शिक्षा अधिकारी ने 9 अक्टूबर को आदेश जारी कर प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला को मस्तूरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल कुकुर्दीकेरा, व्याख्याता रश्मि गुप्ता को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपेड़ी और व्याख्याता संजय दुबे को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर में कार्य करने के लिए निर्देशित किया है। इस पूरे मामले में
सवाल यही है कि क्या छात्राओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामले में सिर्फ तबादले से न्याय हो जाएगा? क्या बिलासपुर डीईओ ने जानबूझकर नरम कार्रवाई कर मामले को ठंडा करने की कोशिश की? या इसके पीछे और भी कोई वजह है!







