बिलासपुर

युक्तियुक्तकरण मामले में पूर्व डीईओ सवालों के कटघरे में, बहन को लाभ दिलाने का आरोप,, जांच में हो सकते है कई अहम खुलासे..

बिलासपुर – युक्तियुक्तकरण में फर्जीवाड़ा की कहानी
परत दर परत खुलकर सामने आ रही है। जहा पूर्व डीईओ अनिल तिवारी भी सवालों के कटघरे में है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व डीईओ अनिल तिवारी के द्वारा अपनी शिक्षिका बहन को युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से लाभ दिलाने का आरोप है। सूत्र बताते है कि अगर मामले में जांच हुई तो कई गम्भीर खामियां इस प्रक्रिया में उभर कर सामने आएगी। इसी कड़ी में एक ध्यान आकर्षित करने वाला मामला प्रकाश में आया है। जहा युक्तियुक्तकरण के दौरान पूर्व डीईओ अनिल तिवारी कि बहन चित्र रेखा तिवारी को सुनियोजित तरीके से लाभ दिलाया गया है। मिली जानकारी के अनुसार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कन्या, तारबाहर में प्रधान पाठक के रुप में चित्र रेखा तिवारी अतिशेष हुई थी। जिसके बाद पूर्व डीईओ अनिल तिवारी का पूरा अमला इस ओर जूझ गया। जहा युक्तियुक्तकरण के दौरान मोजूद अफसरों के नाक के नीचे उन्होंने अपनी बहन चित्ररेखा तिवारी को 4/6/2025 को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गतौरा चयनित कराया गया। जिसके बाद ऑफीशियली चित्ररेखा तिवारी शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कन्या, तारबाहर से रिलीव होकर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गतौरा पहुंची।

जहां पूर्व से निर्धारित तरीके से वहा के प्रधान पाठक ने तत्कालीन डीईओ अनिल तिवारी से उक्त पद पर पहले से प्रधान पाठक पदस्थ होने की जानकारी देते हुए मार्गदर्शन मांग। लेकिन महीनो बाद भी उनके द्वारा कोई भी मार्गदर्शन नही दिया गया। जिसके बाद चित्ररेखा तिवारी शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कन्या, तारबाहर में ही संलग्न रही। इधर सयुक्त संचालक द्वारा 22 जनवरी 2026 को उक्त मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को मामले का निराकरण करने पत्र मिला। जिसको वर्तमान डीईओ द्वारा निराकृत कर दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि प्रधान पाठिका चित्ररेखा तिवारी शहर के स्कूल का मोह नहीं छोड़ना चाहती है। अगर इस मामले में उचित जांच हुई तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आयेंगे। जिससे इस पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

युक्तियुक्तकरण में करीब 200 शिक्षक के शिकायत हुआ मान्य, पूरी प्रक्रिया सवालों के कटघरे में…

युक्तियुक्तकरण में पूर्व में जिस तरह शिक्षा विभाग के अमले की पीठ थपथपाई गई थी। उसकी कलई चंद महीनों में खुल गई है। विश्वसनीय सूत्रों कि माने तो जिले में जून माह में एक साथ करीब 488 शिक्षको को युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षक की कमी से जूझ रहे स्कूलों में भेजा गया था। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में करीब 268 (50) प्रतिशत शिक्षको ने आपत्ति दर्ज कराई थी। जिसमे से करीब 200 शिक्षको कि आपत्ति जांच के बाद सही पाई गई। अगर मामले में शिक्षा विभाग के अफसरों ने सही ढंग से युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को पूरा किया था। तो आखिर करीब 40 प्रतिशत शिक्षको की आपत्ति सही क्यों हुई। इससे यह तो साफ है। कि इस पूरी प्रक्रिया में काफी षड्यंत्र रचा गया है। जिसके कारण उक्त प्रक्रिया के महीनो बाद भी प्रशासनिक अमला उन गलतियों को सुधारने अपना समय व्यतीत करने मजबूर है और इसे अंजाम देने वाले अफसर मस्त है।

जांच में कई अहम खुलासे होने की प्रबल संभावना,, जिला प्रशासन के आला अफसरों को करनी चाहिए पहल…

युक्तियुक्तकरण का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधार करना था लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी से शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त होने के बजाय ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गया है सूत्रों की माने तो शिक्षा विभाग का एक अमला केवल ऐसे मामलों के निराकरण के लिए अब भी समय व्यतीत करने मजबूर है। स्टाफ की कमी से जूझ रहे इस विभाग की स्थिति यूं है कि शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कर्मचारी चाह कर भी रुचि नहीं ले पा रहे हैं जिसका खामियाजा कहीं ना कहीं अंचल के बच्चों को उठाना पड़ रहा है ऐसे में युक्तियुक्तकरण के दौरान हुए गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन के अफसरों को जांच कमेटी के गठन करने की जरूरत समझी जा रही है ताकि इस पूरी प्रक्रिया में उठ रहे सवालों पर विराम लगे और जवाब से दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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