400 साल पुरानी मां मन्नादाई की महिमा, 827 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित, दशहरा पर जला 20 फीट का रावण..

भुवनेश्वर बंजारे
सीपत – ग्राम सोंठी स्थित प्राचीन और स्वयं-प्रकट बगलामुखी मां मन्नादाई मंदिर में शारदीय नवरात्रि 2026 का महापर्व अत्यंत धूमधाम, भक्ति और सामाजिक समरसता के साथ संपन्न हुआ। नौ दिनों तक मंदिर परिसर आस्था और लोकसंस्कृति का केंद्र बना रहा। मंदिर में मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी। साथ ही ज्योति कलश कक्षा में 827 मनोकामना ज्योति कलश जलाए गए थे। वही समिति के द्वारा मंदिर परिसर में धार्मिक पूजा-अनुष्ठान के साथ-साथ जनसेवा के कार्य भी हुए। मंदिर परिसर में निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कैंप लगाया गया और भारतीय डाक विभाग द्वारा ग्रामीणों के निशुल्क खाते खोले गए। इस वर्ष नवरात्रि के दौरान 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन किए। इधर नवरात्रि पर गांव की परंपरा के अनुसार 125 से अधिक बालिकाओं का कन्या भोज आयोजित किया। जिसके बाद शाम को मां दुर्गा विसर्जन की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण 40 सदस्यों का कर्मा दल रहा। जिसमे कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पूरे गांव में नृत्य करते हुए शोभायात्रा को जीवंत बना दिया। इस दल के पीछे महिलाएं थाली में पूजा सामग्री लेकर जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। इस भक्ति मय माहौल ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, जिसे देख हर किसी का मन श्रद्धा से भर उठा।
दशहरा पर भक्ति और उल्लास का संगम, बाल कलाकारों ने जीता दिल, 20 फीट ऊंची लपटों में जला रावण
दशहरा की रात मंदिर परिसर में बने मंच पर विशेष कार्यक्रम हुआ। मंच पर बाल कलाकारों ने राम, लक्ष्मण, भरत और हनुमान की जीवंत झांकी प्रस्तुत की। पीले वस्त्र और सुनहरे मुकुट पहने इन बच्चों को देखने के लिए पूरा गांव उमड़ा। इसके बाद राम-रावण संवाद की नाटिका का मंचन हुआ। रात करीब 9 बजे आतिशबाजी के साथ रावण दहन किया गया। पहले आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी फूटी, फिर विशाल रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा। लपटें 20 फीट से ऊंची उठ रही थीं। इस दौरान मंदिर परिसर लाइटिंग से जगमगा रहा था और हजारों लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल में कैद किया। रावण दहन के बाद मिष्ठान वितरण किया गया। अंत में सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करते हुए ग्राम के सभी स्त्री-पुरुषों ने एक-दूसरे को सोन पत्ती (शमी पत्र) भेंट कर दशहरा मिलन किया।
400 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास
मां मन्नादाई सेवा समिति के अध्यक्ष रामेश्वर जायसवाल ने बताया कि ग्राम सोंठी में लगभग 400 वर्ष पुरानी स्वयं-प्रकट बगलामुखी माता की प्रतिमा विराजित है। मान्यता है कि धामा धूर्वा बैगा द्वारा इसे ठडगा पहाड़ से अपने कंधे पर उठाकर लाया गया था। जिसके बाद से ही मंदिर के साथ साथ माता की ख्याति पूरे अंचल में निरंतर फैल रही है। वही विगत कई वर्षों से मंदिर का संचालन मां मन्नादाई सेवा समिति द्वारा किया जाता है। समिति के अध्यक्ष रामेश्वर जयसवाल ने बताया कि नवरात्रि पर्व के दौरान मंदिर की ख्याति के अनुरूप 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया है।
सेवा में जुटा रहा पूरा गांव
कार्यक्रम को सफल बनाने में भीम प्रताप सिंह ठाकुर, भूपेंद्र तिवारी, राज किशोर ठाकुर, अशोक जायसवाल, अजय डीक्सेना, हीरालाल पटेल, महेंद्र जायसवाल, आचार्य पंडित प्रमोद तिवारी, कार्तिक राम मरकाम, श्याम सुंदर पटेल, भूषण पटेल, चुनाव पटेल, अनित यादव, मधुसूदन वैष्णव सहित समस्त ग्रामवासियों ने दिन-रात सहयोग प्रदान किया।


