भक्ति, भाव और विश्वास का महासंगम: मिनोचा कॉलोनी में जया किशोरी की नानी बाई का मायरो कथा सुन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब,

बिलासपुर – श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा मिनोचा कॉलोनी में आयोजित विश्व विख्यात आध्यात्मिक प्रवक्ता जया किशोरी की नानी बाई का मायरो कथा एवं भजन कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पहुंचे और श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबकर भजन-कीर्तन में झूमते नजर आए। महिलाओं ने भक्ति गीतों पर नृत्य किया, वहीं पूरा वातावरण राधे-कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
कथा की शुरुआत करते हुए जया किशोरी ने जीवन से जुड़े गूढ़ और प्रेरक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण फैसले कभी भी दूसरों के कहने पर नहीं लेने चाहिए। लोग क्या कहेंगे, इस डर से लिए गए निर्णय जीवन भर बोझ बन जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनसे किसी प्रकार की वापसी की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। भगवान जितना दें, उसे श्रद्धा भाव से स्वीकार करना चाहिए। घर में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत बुजुर्गों के आशीर्वाद से करनी चाहिए, क्योंकि बुजुर्गों के अनुभव और सीख जीवन को सही दिशा देते हैं।

भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करते हुए जया किशोरी ने “श्री राधे गोविंदा मन भज ले हर का प्यारा नाम है”, “गोपाला हर का प्यारा नाम है” जैसे भक्ति गीत सुनाए। इन गीतों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते रहे। इसके बाद उन्होंने नानी बाई का मायरो कथा का शुभारंभ किया। जया किशोरी ने नरसिंह जी के बचपन की कथा सुनाते हुए बताया कि नरसिंह जी जन्म से ही गूंगे और बहरे थे तथा अपनी दादी के साथ रहते थे। एक बार गांव में आए महाराज जी ने उनके सिर पर हाथ रखकर “राधे कृष्ण” का मंत्र दिया, जिससे चमत्कार हुआ और नरसिंह जी बोलने लगे

। महाराज जी ने भविष्यवाणी की कि यह बालक भगवान का बड़ा भक्त बनेगा। आगे कथा में बताया गया कि ठाकुर जी ने नरसिंह जी को आशीर्वाद दिया कि उन्हें इतना धन और अन्न प्राप्त होगा कि बारह पीढ़ियां बैठकर खाएं तब भी समाप्त नहीं होगा। कथा को आगे बढ़ाते हुए जया किशोरी ने बताया कि नानी बाई का मायरो तब प्रारंभ होता है, जब नरसिंह जी की नातिन के विवाह की बात आती है और लग्न पत्रिका लिखी जाती है। उन्होंने समझाया कि जब कोई मंगल कार्य होता है तो सबसे पहले गणेश जी को पत्रिका लिखी जाती है, फिर सबसे करीबी और विशेष व्यक्ति को। आज के समय में लोग गरीब रिश्तेदारों को अपने संबंधों की जानकारी देने से कतराते हैं, जबकि धनवानों से रिश्ता जताने में संकोच नहीं करते। उन्होंने कहा कि लोगों से वापसी की उम्मीद मत रखिए, बल्कि यह भावना रखें कि आपके कर्मों से ईश्वर प्रसन्न रहें।

जया किशोरी ने मायरो के पदों को गीतों के रूप में गाकर हिंदी में सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि नानी बाई के विवाह के बाद नरसिंह जी ने अपनी बेटी को वर्षों तक नहीं देखा। जब नानी बाई की बेटी की शादी तय हुई और नरसिंह जी तक खबर नहीं पहुंची, तब कैसे पत्रिका भेजी गई और मायरा की तैयारी शुरू हुई, इस पूरे प्रसंग को उन्होंने भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। कथा के दौरान जया किशोरी ने राधा-कृष्ण, गोपियों, महादेव और पार्वती से जुड़ी कथाएं भी सुनाईं। उन्होंने कहा कि “गोपी” का अर्थ केवल स्त्री नहीं, बल्कि वह भाव है जिसमें रास के दर्शन होते हैं। जिसके भीतर गोपी भाव होता है,

वही भगवान कृष्ण के रस का अनुभव कर सकता है। कार्यक्रम के पूर्व श्री प्रेम सेवा परिवार द्वारा आरती की गई तथा जया किशोरी का सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधायक सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी सहित कई जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। समिति ने श्रद्धालुओं से समय से पूर्व पहुंचकर कथा एवं भजन का लाभ लेने की अपील की है। कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क है और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।


