कमीशन के लालच में साइबर ठगी का जाल! बिलासपुर के 8 च्वाइस सेंटर संचालक फंसे, QR कोड से खाते में डलवाए ₹1.39 लाख, नकदी लेकर फरार हुए ठग

भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – साइबर ठग अब च्वाइस सेंटर संचालकों को अपना निशाना बना रहे हैं। कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम जमा कराई जा रही है और बदले में नकदी लेकर आरोपी निकल जा रहे हैं। बाद में ठगी की रकम का पता चलने पर बैंक खाते होल्ड हो रहे हैं और संचालक मुसीबत में फंस रहे हैं। बिलासपुर में सामने आए इस मामले में आठ च्वाइस सेंटर संचालकों के साथ कुल 1 लाख 39 हजार 899 रुपये की धोखाधड़ी किए जाने की शिकायत रेंज साइबर थाने में की गई है।
क्यूआर कोड स्कैन कराया, खाते में डलवाए 16 हजार
हिर्री क्षेत्र के ग्राम खरकेना निवासी देवेन्द्र रजक बिल्हा मोड़ पर लक्ष्मी च्वाइस सेंटर चलाते हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे नीले रंग की एक्टिवा से एक युवक उनके सेंटर पहुंचा। उसने क्यूआर कोड के जरिए खाते में रकम जमा कराने और बदले में नकद लेने की बात कही। इसके बदले संचालक को कमीशन देने का लालच दिया गया। सहमति मिलने पर युवक ने क्यूआर कोड का फोटो खींचकर किसी अन्य व्यक्ति को भेज दिया। इसके बाद देवेन्द्र के खाते में 16 हजार रुपये जमा हुए। युवक को पूरी रकम नकद दे दी गई, जबकि संचालक को 150 रुपये सर्विस चार्ज मिला। अगले दिन बैंक खाता होल्ड होने पर मामले का खुलासा हुआ। बैंक से पता चला कि खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम आने के कारण कार्रवाई की गई है।
सात अन्य संचालक भी जाल में फंसे
देवेन्द्र रजक ने 12 अक्टूबर को रेंज साइबर थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। शिकायत में राकेश कौशिक, राकेश कुमार साहू, छत्रपाल गेन्ड्रे, दीपक कुमार वस्त्रकार, राहुल कुमार साहू, आकाश पालीवाल और भूपेन्द्र सिंह सहित सात अन्य च्वाइस सेंटर संचालकों के नाम भी दिए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, सभी के साथ इसी तरह की धोखाधड़ी हुई है।
फर्जी पहचान के दस्तावेज देने की आशंका
शिकायत के अनुसार, एक्टिवा सवार युवक ने पहचान के तौर पर अंकित आहूजा और रमेश सिंह के नाम वाले आधार कार्ड दिए थे। इन दस्तावेजों की वास्तविकता की पुष्टि होना बाकी है। पीड़ितों ने एक्टिवा का नंबर भी पुलिस को सौंपा है। पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर आरोपी की तलाश कर रही है।
दूसरे जिलों में भी फैले हो सकते हैं पीड़ित
च्वाइस सेंटर संचालकों के वाट्सएप ग्रुप के जरिए देवेन्द्र को पता चला कि अन्य संचालक भी इसी तरीके से ठगी का शिकार हुए हैं। दूसरे जिलों से भी पीड़ितों के सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, प्रभावित खातों और कुल ठगी की रकम का विस्तृत आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। साइबर ठगी का पैसा खाते में जमा होने और उसे नकद निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को देने से खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है। ऐसे में कमीशन के लालच में अनजान लोगों के लिए रकम का लेन-देन करना भारी पड़ सकता है।


