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बिलासपुर में पटवारी का कथित रिश्वत वीडियो वायरल, 25 हजार लेने का आरोप…

भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – न्यायधानी बिलासपुर में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम लोहर्सी-सोन से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति को जमीन के बंटवारे के नाम पर पैसे लेते हुए दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है। संबंधित व्यक्ति की पहचान पटवारी ऋषि गोस्वामी के रूप में बताई जा रही है। आरोप है कि किसान से जमीन का बंटवारा कराने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई थी, जबकि वायरल वीडियो में कथित तौर पर 25 हजार रुपये लेते हुए दिखाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सत्याग्रह न्यूज़ इस वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, इसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और कथित लेन-देन की पुष्टि नहीं करता है।

जमीन बंटवारे के नाम पर रकम लेने का दावा

पूरा मामला पटवारी हल्का नंबर 14, ग्राम लोहर्सी-सोन का बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी के मुताबिक, एक किसान जमीन के बंटवारे से संबंधित काम कराने के लिए पटवारी के पास पहुंचा था। इसी दौरान कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग किए जाने और 25 हजार रुपये दिए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। वायरल वीडियो को इसी कथित लेन-देन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, रकम किस उद्देश्य से दी जा रही थी और क्या इसका संबंध जमीन के बंटवारे से था, यह जांच का विषय है। केवल सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से किसी व्यक्ति पर लगे आरोपों को सही नहीं माना जा सकता।

पुराना वीडियो या हालिया मामला, सवाल बरकरार

इस मामले में सबसे अहम सवाल वीडियो की तारीख को लेकर है। बताया जा रहा है कि वीडियो उस समय का है, जब पटवारी ऋषि गोस्वामी की पदस्थापना लोहर्सी-सोन में थी। वर्तमान में उनकी पदस्थापना पचपेड़ी क्षेत्र में होने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, वीडियो कब बनाया गया था, यह कितने महीने या साल पुराना है और इसे अब सोशल मीडिया पर वायरल करने के पीछे क्या वजह है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यदि वीडियो पुराना है, तो अब तक इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंची थी या नहीं, यह भी स्पष्ट होना बाकी है। वहीं, यदि पहले शिकायत नहीं हुई थी, तो वीडियो सामने आने के बाद मामले की जांच कर तथ्यों को स्पष्ट करना जरूरी होगा।

राजस्व विभाग की जांच पर टिकी निगाहें

वीडियो वायरल होने के बाद अब राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। क्या विभाग वीडियो की सत्यता की जांच कराएगा? क्या संबंधित किसान का बयान दर्ज कर कथित लेन-देन की जानकारी जुटाई जाएगी? क्या वीडियो की तारीख और घटनास्थल की पुष्टि की जाएगी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं। फिलहाल मामला आरोपों और वायरल वीडियो तक सीमित है। न तो कथित रिश्वतखोरी की पुष्टि हुई है और न ही विभागीय कार्रवाई की कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ बिना प्रमाण निष्कर्ष न निकाला जाए।

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