रतनपुर में चलती 108 एंबुलेंस में गूंजी किलकारी, EMT जयन्त कश्यप और पायलट जय नारायण की सूझबूझ से हुआ सुरक्षित प्रसव, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ.

डेस्क
रतनपुर – जब दर्द से तड़पती एक मां और उसके गर्भ में पल रही एक नई जिंदगी के बीच सांसें अटकी थीं, तब 108 संजीवनी एम्बुलेंस के दो जाबांज जवान फरिश्ता बनकर पहुंचे। चलती एम्बुलेंस को ही अस्पताल बनाकर उन्होंने न सिर्फ सुरक्षित प्रसव कराया, बल्कि एक परिवार की खुशियां लौटा दी।
यह पूरा मामला बिलासपुर जिले अंतर्गत पीएचसी टेंगनमाड़ा का है। जहा मंगलवार को करीब 7 बजे 35 वर्षीय गर्भवती महिला लेबर पेन को लेकर पीएचसी पहुंची थी। जहाँ उन्हें 102 एम्बुलेंस के मदद से सीएचसी रतनपुर रेफर किया गया। जैसे ही एंबुलेंस बेलगहना के पास पहुंचने वाली थी। अचानक महिला की हालत बिगड़ने लगी। उसे सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी और प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। साथ चल रहे परिजन घबरा गए। इसी बीच तत्काल 108 को कॉल कर इसकी सूचना दी गई। कॉल मिलते ही सीएचसी रतनपुर में तैनात ए एल एस एंबुलेंस क्रमांक CG04 QY 0282 हरकत में आई। जिसमे तैनात एमटी जयन्त कुमार कश्यप और पायलट जय नारायण वैष्णव बिना एक सेकंड गंवाए रतनपुर कॉलोनी लोकेशन पर पहुंचे और मरीज को अपनी एम्बुलेंस में शिफ्ट किया। इधर एंबुलेंस सीएचसी रतनपुर की ओर तेजी से दौड़ रही थी, लेकिन दर्द से तड़पती बीना की हालत देख ईएमटी जयन्त समझ गए कि अब अस्पताल पहुंचने तक इंतजार करना खतरे से खाली नहीं है। फिर क्या पायलट जय नारायण ने एम्बुलेंस को साइड में सुरक्षित खड़ा किया और ईएमटी जयन्त ने अपनी ट्रेनिंग और अनुभव के दम पर एम्बुलेंस में ही प्रसव कराने का साहसिक फैसला लिया। कुछ ही मिनटों की मेहनत के बाद एम्बुलेंस में एक नन्हीं किलकारी गूंज उठी। मां ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। नवजात के रोने की आवाज सुनते ही परिजनों की आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान आ गई। तुरंत मां और नवजात दोनों की प्राथमिक जांच कर उन्हें सुरक्षित रूप से सीएचसी रतनपुर में भर्ती कराया गया। जहा डॉक्टरों के मुताबिक जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि 108 एम्बुलेंस सेवा सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि ग्रामीण छत्तीसगढ़ के लिए चलता-फिरता अस्पताल है, जहां हर कर्मचारी अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान बचाने के लिए तैयार रहता है।


