बिलासपुर

हृदय गति रुकने पर कैसे बचाएं मरीज की जान? सिम्स में डॉक्टरों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में एनेस्थीसिया विभाग द्वारा दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। मेडिकल एजुकेशन यूनिट के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एवं एडवांस्ड कार्डियोवैस्कुलर लाइफ सपोर्ट (एसीएलएस) कि अहम जानकारी दी गई।
इस कार्यशाला में 17 प्रतिभागियों ने जीवनरक्षक तकनीकों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य चिकित्सकों को हृदय गति रुकने सहित अन्य गंभीर आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल और प्रभावी उपचार देने के लिए सक्षम बनाना था। इसको लेकर अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा में मरीज की जान बचाने के लिए चिकित्सक का ज्ञान, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और व्यावहारिक दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। हृदय गति रुकने जैसी गंभीर स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित चिकित्सक समय पर सही जीवनरक्षक तकनीकों का उपयोग कर मरीज के जीवित रहने की संभावना बढ़ा सकते हैं। डॉ. मूर्ति ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि चिकित्सकों को वास्तविक आपात परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलना चाहिए। इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं चिकित्सकों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं को भी अधिक प्रभावी बनाती हैं। सिम्स का प्रयास है कि यहां अध्ययनरत चिकित्सक आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और जीवनरक्षक तकनीकों में दक्ष होकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें। कार्यशाला में सिम्स के एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, जीएमसी अंबिकापुर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिल्पा खन्ना तथा रायपुर स्थित बालाजी मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. अनीशा नगरिया ने प्रशिक्षण में योगदान दिया। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली के विशेषज्ञ भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। वही प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), कृत्रिम श्वसन, हृदय की निगरानी, डिफिब्रिलेशन, वायुमार्ग प्रबंधन तथा गंभीर हृदय संबंधी आपात स्थितियों में टीम के साथ समन्वय बनाकर उपचार करने की तकनीकों से अवगत कराया गया।साथी एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति ने बताया कि युवा चिकित्सकों को जीवनरक्षक तकनीकों में दक्ष बनाना इस प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है। दो दिवसीय कार्यशाला में 17 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान व्यावहारिक अभ्यास और आपातकालीन परिस्थितियों के अनुरूप उपचार संबंधी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. राकेश नहरेल, डॉ. बी.पी. सिंह, डॉ. भूपेंद्र कश्यप और डॉ. सुजीत नायक सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन से संबंधित जीवनरक्षक प्रशिक्षण
बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) में हृदय गति और सांस रुकने जैसी आपात स्थितियों में सीपीआर तथा शुरुआती जीवनरक्षक उपायों का प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, एडवांस्ड कार्डियोवैस्कुलर लाइफ सपोर्ट (एसीएलएस) में गंभीर हृदय संबंधी आपात स्थितियों के प्रबंधन, हृदय की निगरानी, डिफिब्रिलेशन, दवाओं के उपयोग और टीम आधारित उपचार पर विशेष जोर दिया जाता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) इन जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए मानक पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण व्यवस्था संचालित करता है। ऐसे प्रशिक्षण से चिकित्सकों को आपातकालीन परिस्थितियों में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्य करने में मदद मिलती है।
मरीजों को मिलेगा बेहतर आपातकालीन उपचार
सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलती है। दुर्घटना, हृदय गति रुकने और अन्य गंभीर परिस्थितियों में प्रशिक्षित चिकित्सक समय पर उचित कदम उठाकर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

BREAKING